Soil Health Card Scheme 2026 मृदा स्वास्थ्य कार्ड Easy Apply

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना Soil Health Card Scheme 2025

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के अंतर्गत किसानों की मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और उत्पादन बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए जाते हैं। इन कार्यों का उद्देश्य soil testing, nutrient management और balanced fertilizer use को बढ़ावा देना है।

1. खेत से मिट्टी के नमूने (Soil Sample) एकत्र करना

किसानों के खेतों से वैज्ञानिक तरीके से soil samples लिए जाते हैं, ताकि मिट्टी की वास्तविक स्थिति का सही आकलन किया जा सके।

2. सरकारी प्रयोगशालाओं में मिट्टी की जांच (Soil Testing)

एकत्र किए गए नमूनों की soil testing laboratories में जांच की जाती है, जहां प्रमुख पोषक तत्वों की मात्रा मापी जाती है।

3. पोषक तत्वों का विश्लेषण (Nutrient Analysis)

मिट्टी में मौजूद नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), पोटाश (K), सल्फर, जिंक, आयरन और जैविक कार्बन का विश्लेषण किया जाता है।

4. Soil Health Card जारी करना

जांच के बाद प्रत्येक किसान को Soil Health Card दिया जाता है, जिसमें उसकी जमीन की पूरी रिपोर्ट दर्ज होती है।

5. फसल-वार उर्वरक सिफारिश (Crop-wise Fertilizer Recommendation)

Soil Health Card के आधार पर किसानों को यह बताया जाता है कि किस फसल के लिए कौन-सा और कितना उर्वरक उपयोग करना चाहिए।

6. संतुलित उर्वरक उपयोग पर मार्गदर्शन

किसानों को balanced fertilizer use की सलाह दी जाती है, जिससे अनावश्यक खर्च कम हो और मिट्टी की सेहत बनी रहे।

7. मृदा सुधार उपाय सुझाना (Soil Improvement Measures)

कमजोर मिट्टी के लिए जैविक खाद, ग्रीन मैन्योर, चूना/जिप्सम जैसे सुधार उपाय बताए जाते हैं।

8. किसान प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम

किसानों को soil health awareness programs के माध्यम से मिट्टी संरक्षण और टिकाऊ खेती की जानकारी दी जाती है।

9. उत्पादन बढ़ाने के उपाय बताना

मिट्टी की रिपोर्ट के आधार पर crop yield improvement के उपाय सुझाए जाते हैं, जिससे किसान अधिक लाभ कमा सकें।

10. खेती की लागत कम करने में सहायता

सही उर्वरक उपयोग से input cost कम होती है और किसानों की आय बढ़ती है।

    . मिट्टी का परीक्षण (Soil Testing Process)

    इस योजना के तहत कृषि विभाग द्वारा किसानों के खेतों से soil samples एक निर्धारित विधि से एकत्र किए जाते हैं।

    • खेत के अलग-अलग हिस्सों से नमूना लिया जाता है
    • मिट्टी की ऊपरी परत (Top Soil) से सैंपल लिया जाता है
    • नमूनों को लेबल कर प्रयोगशाला भेजा जाता है

    2. प्रयोगशाला में जांच (Laboratory Analysis)

    सरकारी Soil Testing Laboratories में मिट्टी की जांच की जाती है, जहां प्रमुख पोषक तत्वों का विश्लेषण होता है, जैसे:

    • नाइट्रोजन (Nitrogen – N)
    • फॉस्फोरस (Phosphorus – P)
    • पोटाश (Potassium – K)
    • सल्फर, जिंक, आयरन
    • जैविक कार्बन (Organic Carbon)
    • मिट्टी का pH मान

    3. मिट्टी की रिपोर्ट तैयार करना (Soil Test Report)

    जांच के बाद किसानों के लिए एक Soil Health Card Report तैयार की जाती है।
    इस रिपोर्ट में निम्न जानकारी होती है:

    • मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों की मात्रा
    • मिट्टी की गुणवत्ता (अच्छी, मध्यम या कमजोर)
    • pH स्तर के आधार पर फसल उपयुक्तता

    4. फसल-वार उर्वरक सिफारिश (Crop-wise Recommendation)

    Soil Health Card रिपोर्ट के आधार पर किसानों को बताया जाता है:

    • कौन-सी फसल खेत के लिए उपयुक्त है
    • किस उर्वरक की कितनी मात्रा डालनी चाहिए
    • जैविक खाद या मृदा सुधार की जरूरत है या नहीं

    5. डिजिटल और प्रिंट रिपोर्ट सुविधा

    कई राज्यों में किसान अपनी Soil Health Card Report

    • कृषि विभाग से प्रिंट रूप में
    • या ऑनलाइन पोर्टल / मोबाइल ऐप से
      आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

    6. किसानों को होने वाले लाभ

    • उर्वरक पर अनावश्यक खर्च कम होता है
    • मिट्टी की सेहत लंबे समय तक बनी रहती है
    • फसल उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार होता है
    • खेती अधिक लाभदायक बनती है

    Step 1: अपने खेत का पंजीकरण कराएं

    सबसे पहले किसान को अपने क्षेत्र के कृषि विभाग / कृषि विस्तार अधिकारी / CSC केंद्र में जाकर खेत का पंजीकरण कराना होता है।

    Step 2: मिट्टी का नमूना देना (Soil Sample Collection)

    कृषि विभाग की टीम या अधिकृत कर्मचारी किसान के खेत से मिट्टी का नमूना वैज्ञानिक तरीके से लेते हैं।

    • खेत के अलग-अलग हिस्सों से नमूना
    • सही गहराई से मिट्टी संग्रह

    Step 3: प्रयोगशाला में मिट्टी की जांच

    एकत्र किए गए soil samples को सरकारी Soil Testing Laboratory में भेजा जाता है, जहां पोषक तत्वों की जांच होती है।

    Step 4: Soil Health Card Report तैयार होना

    जांच पूरी होने के बाद किसान के नाम से Soil Health Card Report तैयार की जाती है, जिसमें मिट्टी की पूरी जानकारी होती है।

    Step 5: Soil Health Card प्राप्त करें

    • किसान Soil Health Card को:
    • कृषि विभाग कार्यालय से प्रिंट रूप में
    • या राज्य के कृषि पोर्टल / ऑनलाइन सिस्टम से
    • आसानी से प्राप्त कर सकता है।

    Step 6: कार्ड के अनुसार खेती करें

    Soil Health Card में दी गई crop-wise fertilizer recommendation के अनुसार खेती करने से:

    • उर्वरक खर्च कम होता है
    • उत्पादन बढ़ता है
    • मिट्टी की सेहत बनी रहती है
    • आधार कार्ड
    • भूमि रिकॉर्ड (खसरा / खतौनी)
    • मोबाइल नंबर
    • किसान पंजीकरण विवरण

    आमतौर पर 30–45 दिन में मिट्टी जांच पूरी होकर Soil Health Card जारी कर दिया जाता है (राज्य अनुसार समय बदल सकता है)।

    ✔ हर 2–3 साल में मिट्टी जांच जरूर कराएं
    ✔ Soil Health Card की सलाह को फॉलो करें
    ✔ ज्यादा खाद डालने से बचें

    Soil Health Card Scheme – कार्ड कैसे प्राप्त करें? (FAQs)
    Soil Health Card क्या होता है? +
    Soil Health Card एक सरकारी रिपोर्ट होती है, जिसमें किसान की मिट्टी की गुणवत्ता, पोषक तत्वों की मात्रा और फसल-वार उर्वरक सलाह दी जाती है।
    Soil Health Card प्राप्त करने के लिए आवेदन कहां करें? +
    किसान अपने नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय, कृषि विस्तार अधिकारी या CSC केंद्र के माध्यम से Soil Health Card के लिए पंजीकरण कर सकते हैं।
    मिट्टी का नमूना कैसे लिया जाता है? +
    कृषि विभाग द्वारा खेत के अलग-अलग हिस्सों से वैज्ञानिक तरीके से मिट्टी का नमूना लिया जाता है और प्रयोगशाला भेजा जाता है।
    Soil Health Card बनने में कितना समय लगता है? +
    आमतौर पर मिट्टी का नमूना लेने के बाद 30 से 45 दिनों के भीतर Soil Health Card जारी कर दिया जाता है।
    क्या Soil Health Card ऑनलाइन मिल सकता है? +
    हां, कई राज्यों में किसान अपनी Soil Health Card रिपोर्ट राज्य कृषि पोर्टल या ऑनलाइन सिस्टम से डाउनलोड कर सकते हैं।
    Soil Health Card के लिए कौन-से दस्तावेज़ जरूरी हैं? +
    आधार कार्ड, भूमि रिकॉर्ड (खसरा/खतौनी), मोबाइल नंबर और किसान पंजीकरण विवरण आवश्यक होता है।
    क्या Soil Health Card के लिए कोई शुल्क लगता है? +
    नहीं, Soil Health Card योजना के तहत मिट्टी की जांच और कार्ड जारी करना किसानों के लिए निःशुल्क होता है।
    Soil Health Card कितने समय तक मान्य रहता है? +
    आमतौर पर Soil Health Card 2–3 वर्षों तक मान्य रहता है, इसके बाद पुनः मिट्टी जांच करानी चाहिए।
    क्या हर किसान Soil Health Card बनवा सकता है? +
    हां, भारत का कोई भी किसान, चाहे छोटा हो या बड़ा, Soil Health Card योजना का लाभ ले सकता है।
    Soil Health Card से किसान को क्या लाभ होता है? +
    इससे उर्वरक खर्च कम होता है, मिट्टी की सेहत बनी रहती है और फसल उत्पादन व गुणवत्ता में सुधार होता है।

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